Wednesday, December 3, 2025

सु-विचारधन

 २५.

पत्यांमधला "जोकर"

आणि

जवळच्या माणसांनी दिलेली "ठोकर" कधीही डाव बदलु शकतात...

 

२६.              

"थोड़ा सा बचपन साथ रखियेगा जिंदगी की शाम मे....

उम्र महसूस ही न होगी, सफ़र के आखरी मुकाम में...."

 

२७.              

 कधी काळी शेजारी सुद्धा घराचा एक भाग असत..

आज एकाच घरात किती शेजारी असतात...

 

२८.              

अब दरीया तक कोई नही जाता,

लोग नेकी करके फेसबुक पर ही डाल देते है...

 

२९.              

'अभिमान' तब आता है, जब हमें लगता है कि हमने कुछ किया है

                     और,

'सम्मान' तब मिलता है जब दुनिया को लगता है कि आपने कुछ किया है..!!

 

३०.  

 मुझे किसी की जरुरत नही है

"अहम"

सबको मेरी जरुरत है

"वहम"

 

३१.           

"अपमान" करणं

स्वभावात असू शकतं...

पण

"सन्मान" करणं संस्कारात असावं लागतं...

 

३२.              

लकीरें तो हमारी भी बहुत ख़ास है ,

तभी तो आप जैसे लोग हमारे पास है...  

 

३३.

जगण्यातले सर्वांत कणखर आव्हान म्हणजे ?

मनाला लावून न घेणे......

 

३४.

वो बुलंदियाँ भी किस काम की जनाब,

इंसान चढ़े और इंसानियत उतर जाये...

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